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बस्तर को जीतने 5C+V फार्मूले पर है भाजपा

भाजपा ने बस्तर में खोजा जीत का फार्मूला 5 विधानसभा जीते तो मानो बाजी मार ली

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बस्तर की सियासी बिसात पर शह मात के लिए भाजपा और कांग्रेस नेता जोर आजमाईश में जुट गए हैं। दोनों दलों के स्टार प्रचारकों के दौरे भी शुरू हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को बस्तर दौरे पर रहेंगे। वे भानपुरी बस्तर के छोटे आमाबाल में सभा करेंगे। छोटे आमाबाल बस्तर लोकसभा की पांच विधानसभाओं बस्तर, नारायणपुर, जगदलपुर, काेंडागांव और चित्रकाेट काे कवर करती है।

इसमें बस्तर छोड़ सभी चारों विधानसभा भाजपा जीती है। अब लोकसभा में बस्तर सीट पर भी बढ़त लेने की रणनीति बनाई गई है। दरअसल, बस्तर सीट जीतने के लिए भाजपा इस बार 5 सी प्लस वी (विक्ट्री) के फार्मूले पर काम कर रही है।

भाजपा का टार्गेट पांच विधानसभा (कंस्टीच्यूएंसी) सीटों पर निर्णायक बढ़त लेकर अपनी जीत (विक्ट्री) सुनिश्चित करना है। बता दें कि प्रदेश में आरक्षित वर्ग की पांच सीटों में से बस्तर एक मात्र सीट है, जिस पर कांग्रेस के दीपक बैज पिछले चुनाव में जीतने में सफल रहे थे। इस बार भी कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और बस्तर में मजबूत पकड़ रखने वाले कवासी लखमा को मैदान में उतारा है।

विधानसभा चुनाव में बस्तर लोकसभा की 8 में से पांच विस सीटों पर भाजपा को लीड

  • कवासी लखमा : छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री। वर्तमान में कोंटा से विधायक। वार्ड पंच से राजनीति की शुरुआत। 1995-96 में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रहे। 6 बार के विधायक। बस्तर से कांग्रेस के कद्दावर नेता। नक्सल क्षेत्र में अच्छी पकड़।
  • महेश कश्यप : बस्तर सांस्कृतिक सुरक्षा मंच संभागीय संयोजक। 2001-07 विश्व हिंदू परिषद जिला संगठन मंत्री। 2014-19 तक सरपंच। आरएसएस में लंबे समय से सक्रियता। महेश कश्यप किसान हैं।
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2023 के विधानसभा चुनाव के अनुसार
बस्तर: भाजपा को 81,646 मतों की लीड

बस्तर लोकसभा सीट में 8 विधानसभा सीटें हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 5 सीटें जबकि कांग्रेस केवल 3 सीटें जीत सकी। 2023 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के लिहाज से भाजपा को इस लोकसभा सीट पर 81,646 मतों की लीड है।
भाजपा की लीड वाली विधानसभा
कोंडागांव, नारायणपुर, जगदलपुर, चित्रकोट और दंतेवाड़ा।
कांग्रेस की लीड वाली विधानसभा
बस्तर, बीजापुर और कोंटा।
(2018 के विधानसभा चुनाव में बस्तर लोकसभा की 8 विधानसभा
सीटों में से 7 पर कांग्रेस और एक सीट पर भाजपा को बढ़त थी।)

पीएम मोदी की सभा : छोटे आमाबाल में ही क्यों?
600 साल से बस्तर दशहरा में जोगी (योगी) बिठाई की परंपरा चली आ रही है। नौ दिनों तक पूजा निर्विघ्न चले इसके लिए जोगी परिवार के लोग निर्जला व्रत करते हैं। इस परंपरा के वाहक जोगी परिवार छोटे आमाबाल और बड़े आमाबाल गांव से हैं। आदिवासियों के बीच जोगी परिवार के प्रति अगाध श्रद्धा है। पीएम मोदी यहां सभा करके पूरे आदिवासी समाज को जोड़ने और उनको संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

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पीएम मोदी की सभा के लिए 1280 वर्गफीट में बना मंच

छोटे आमाबाल के जिस मैदान में विजय संकल्प महारैली आयोजित होनी है, वहां रविवार से ही पुलिस व पैरामिलेट्री बलों के जवानों तैनात कर दिया गया है। सभास्थल से कुछ ही दूरी पर हेलीपैड बनाया गया है, जहां पीएम मोदी हेलीकॉप्टर से उतरेंगे। सभास्थल तक पहुंचने के लिए करीब 4 घंटे पहले से ही गाड़ियों की आवाजाही बंद कर दी जाएगी। सभास्थल में करीब 1.50 लाख वर्गफीट के क्षेत्रफल में लगाए गए विशालकाय 3 डोम में लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। हर पंडाल की चौड़ाई 100 फीट और लंबाई 500 फीट है। बताया जाता है कि लोगों के बैठने के लिए करीब 30 हजार से ज्यादा कुर्सियां लगाई गई हैं।

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वहीं करीब 1 लाख लोगों के सभा में जुटने का लक्ष्य रखा गया है। एनएच पर सोनारपाल से देवड़ा और चमिया होकर छोटे आमाबाल पहुंचने का रास्ता बंद कर दिया गया है। आम जनता के लिए बनाए जा रहे पंडालों में गर्मी को देखते हुए जंबो कूलर की व्यवस्था भी की गई है। तीनों पंडालों में 60 से ज्यादा जंबो कूलर लगाए गए हैं। जिस मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता को संबोधित करेंगे, वह करीब 1280 वर्गफीट का होगा।

बैज ने पूछे सवाल : रोजगार महंगाई पर पीएम क्यों चुप हैं?
पीएम मोदी के बस्तर प्रवास के पहले प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पूछा कि महंगाई आज चरम पर क्यों है? घर चलाना मुश्किल क्यों है? आम लोग अपना परिवार क्यों नहीं चला पा रहे हैं? पीएम क्यों चुप हैं। आदिवासी समाज का 32 प्रतिशत आरक्षण 15 महीने से राजभवन में बंधक क्यों है? पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने विधानसभा से सर्वसम्मति से आरक्षण संशोधन विधेयक पारित करवा कर राजभवन भेजा था, राजभवन उस पर हस्ताक्षर क्यों नहीं कर रहा है?

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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