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MEDIA HOUSE EXCLUSIVE

दिल्ली में BRICS का महाशिखर सम्मेलन: 11 देशों की ताकत, Global South की नई धुरी और विश्व व्यवस्था के पुनर्संतुलन में भारत की निर्णायक भूमिका

🇮🇳 MEDIA HOUSE MPCG | विशेष विश्लेषण

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नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026

नई दिल्ली में आज से 18th BRICS Summit 2026 का शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है। भारत वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12–13 सितंबर को भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। भारत की अध्यक्षता का केंद्रीय मंत्र है—“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”, अर्थात लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के आधार पर भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का निर्माण। इसका व्यापक दृष्टिकोण “Humanity First” है।

यह केवल नेताओं की बैठक नहीं है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक शक्ति-संतुलन, डॉलर-निर्भरता, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, विकास वित्त, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और Global South की सामूहिक आवाज जैसे बड़े प्रश्न जुड़े हैं।

🔴 1. सबसे पहले समझिए—BRICS आखिर है क्या?

BRICS कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और न ही NATO जैसा कोई सामूहिक रक्षा संगठन।

यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं और Global South के प्रमुख देशों का राजनीतिक, आर्थिक एवं कूटनीतिक समन्वय मंच है।

वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य देश हैं:

1. 🇧🇷 ब्राजील

2. 🇷🇺 रूस

3. 🇮🇳 भारत

4. 🇨🇳 चीन

5. 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका

6. 🇪🇬 मिस्र

7. 🇪🇹 इथियोपिया

8. 🇮🇷 ईरान

9. 🇸🇦 सऊदी अरब

10. 🇦🇪 संयुक्त अरब अमीरात

11. 🇮🇩 इंडोनेशिया

 

इन 11 देशों का संयुक्त भार लगभग 49.5% वैश्विक आबादी, 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार के बराबर बताया गया है।

यानी BRICS अब केवल चार-पांच देशों का आर्थिक क्लब नहीं रहा; इसका भौगोलिक विस्तार एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका तक हो चुका है।

🟠 2. BRICS नाम कैसे बना? इसकी कहानी 2001 से शुरू होती है

BRICS का इतिहास समझने के लिए हमें 2001 में जाना होगा।

Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O’Neill ने 2001 में एक शोध-पत्र में Brazil, Russia, India और China की तेजी से बढ़ती आर्थिक क्षमता को रेखांकित किया।

इन चार देशों के नामों से बना—

B — Brazil
R — Russia
I — India
C — China

यानी BRIC।

उस समय यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं था, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के भविष्य को समझने के लिए इस्तेमाल किया गया आर्थिक विश्लेषणात्मक शब्द था।

लेकिन धीरे-धीरे चार देशों ने इसे कूटनीतिक सहयोग के मंच में बदल दिया।

🟡 3. 2006 में BRIC ने राजनीतिक आकार लिया

2006 में Brazil, Russia, India और China ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्रियों के स्तर पर नियमित समन्वय शुरू किया।

इसके बाद यह प्रक्रिया राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुख स्तर की वार्षिक शिखर बैठक की ओर बढ़ी।

पहला BRIC Summit—16 जून 2009, येकातेरिनबर्ग, रूस।

यहीं से BRIC एक औपचारिक राजनीतिक-आर्थिक समन्वय प्रक्रिया के रूप में सामने आया।

🟢 4. South Africa के आने के बाद BRIC बना BRICS

2010 में South Africa को शामिल करने का निर्णय हुआ और 2011 में उसने पहली बार BRICS Summit में भाग लिया।

इसके बाद—

BRIC → BRICS

हो गया।

इससे संगठन का अफ्रीकी महाद्वीप में भी महत्वपूर्ण प्रवेश हुआ।

🔵 5. 2024 में BRICS का सबसे बड़ा विस्तार

BRICS के इतिहास में एक बड़ा मोड़ जनवरी 2024 में आया।

Egypt, Ethiopia, Iran, Saudi Arabia और UAE नए पूर्ण सदस्य बने।

इसके साथ BRICS का आर्थिक और रणनीतिक भूगोल अचानक काफी विस्तृत हो गया। Indonesia भी बाद में पूर्ण सदस्य के रूप में समूह में शामिल हुआ, जिससे वर्तमान संख्या 11 हो गई।

🔥 6. 2026 का दिल्ली BRICS Summit इतना महत्वपूर्ण क्यों?

क्योंकि भारत इस समय BRICS का Chair है और यह भारत की चौथी BRICS Chairship है।

भारत पहले 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता कर चुका है।

1 जनवरी 2026 को भारत ने चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली।

2026 BRICS के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष भी है क्योंकि समूह की स्थापना के लगभग 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

भारत ने अपनी अध्यक्षता को केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा। सरकारी जानकारी के अनुसार वर्षभर 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।

🌐 7. इस समय दिल्ली में कौन-कौन पहुंचे?

11 सदस्य देशों में से प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष/सरकार प्रमुखों की मौजूदगी में—

🇮🇳 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — भारत

🇨🇳 राष्ट्रपति शी जिनपिंग — चीन

🇷🇺 राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन — रूस

🇿🇦 राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा — दक्षिण अफ्रीका

🇪🇬 राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी — मिस्र

🇮🇩 राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो — इंडोनेशिया

🇮🇷 राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन — ईरान

🇪🇹 प्रधानमंत्री अबी अहमद — इथियोपिया

🇦🇪 अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान — UAE

जबकि ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री Mauro Vieira कर रहे हैं और सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan के भाग लेने की सूचना है।

अर्थात एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि BRICS के सभी 11 देशों के राष्ट्राध्यक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों, ऐसा आवश्यक नहीं है। सदस्य देश अपने वरिष्ठ मंत्री अथवा अन्य अधिकृत प्रतिनिधि को भी भेज सकते हैं।

🌍 8. BRICS में केवल 11 देश ही नहीं—Partner Countries भी हैं

BRICS ने अपने प्रभाव का विस्तार Partner Country mechanism के माध्यम से भी किया है।

वर्तमान Partner Countries में—

Belarus, Bolivia, Cuba, Kazakhstan, Malaysia, Nigeria, Thailand, Uganda, Uzbekistan और Vietnam शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त Summit में संयुक्त राष्ट्र, WHO, NDB तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है।

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इससे BRICS का प्रभाव केवल 11 सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहता।

💰 9. BRICS के पास कितना पैसा है?

यहां एक महत्वपूर्ण भ्रम दूर करना जरूरी है।

BRICS के पास कोई एक साझा “BRICS बजट” नहीं है, जैसे किसी देश का केंद्रीय बजट होता है।

लेकिन BRICS से जुड़ी दो महत्वपूर्ण वित्तीय व्यवस्थाएं हैं—

🏦 New Development Bank — NDB

2014 में Fortaleza Summit में New Development Bank की स्थापना का समझौता हुआ।

इसके—

Authorized Capital = US$100 billion

और प्रारंभिक—

Subscribed Capital = US$50 billion

था।

प्रारंभिक पांच संस्थापक देशों—Brazil, Russia, India, China और South Africa—ने बराबर हिस्सेदारी के साथ शुरुआत की थी।

NDB का मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों में Infrastructure, Sustainable Development, Renewable Energy, Transport, Water, Urban Development जैसे क्षेत्रों के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।

💵 10. CRA क्या है?

BRICS की दूसरी महत्वपूर्ण वित्तीय व्यवस्था है—

Contingent Reserve Arrangement — CRA

इसका प्रारंभिक आकार US$100 billion रखा गया।

इसका उद्देश्य किसी सदस्य देश को अल्पकालिक Balance of Payments / Liquidity Pressure जैसी स्थिति में वित्तीय सुरक्षा देना है।

मूल व्यवस्था में योगदान—

China — $41 billion

Brazil — $18 billion

Russia — $18 billion

India — $18 billion

South Africa — $5 billion

था।

ध्यान रहे—यह पैसा सामान्य BRICS खर्च के लिए रखा हुआ कोई साझा फंड नहीं है। यह एक financial safety mechanism है।

📊 11. आपने “PDP” पूछा है—असल में यहां GDP और PPP महत्वपूर्ण हैं

BRICS के संदर्भ में अक्सर GDP-PPP की चर्चा होती है।

GDP क्या है?

Gross Domestic Product — GDP

किसी देश में एक निश्चित अवधि में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल आर्थिक मूल्य।

PPP क्या है?

Purchasing Power Parity — PPP

यह देशों की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना इस आधार पर करता है कि स्थानीय कीमतों के हिसाब से एक देश की मुद्रा वास्तव में कितनी वस्तु और सेवा खरीद सकती है।

इसलिए BRICS की वैश्विक आर्थिक ताकत बताते समय केवल nominal GDP नहीं बल्कि GDP at PPP भी महत्वपूर्ण संकेतक है।

भारत की दृष्टि से यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि PPP आधार पर भारत की आर्थिक क्षमता nominal dollar GDP की तुलना में काफी बड़ी दिखाई देती है।

⚙️ 12. BRICS काम कैसे करता है?

यहां एक महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य समझना जरूरी है।

BRICS कोई ऐसी संस्था नहीं है जिसकी एक केंद्रीय सरकार हो।

इसके पास EU जैसी supranational authority नहीं है।

इसकी कार्यप्रणाली मुख्यतः—

Summit → Ministerial Meetings → Sherpa Track → Working Groups → Sectoral Cooperation → Joint Declarations

के माध्यम से चलती है।

इसके प्रमुख तीन व्यापक आयाम हैं—

1. Political & Security

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा

आतंकवाद

बहुपक्षीय व्यवस्था

UN reform

क्षेत्रीय संघर्ष

strategic communication

2. Economic & Financial

व्यापार

निवेश

राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार

payment interoperability

development finance

supply chains

infrastructure

3. Cultural & People-to-People

शिक्षा

संस्कृति

युवा

महिला सशक्तिकरण

स्वास्थ्य

अकादमिक सहयोग

innovation

भारत की 2026 Chairship ने इन्हीं तीन व्यापक pillars के अंतर्गत सहयोग को आगे बढ़ाया है।

💳 13. डॉलर को चुनौती? हां—लेकिन “डॉलर खत्म” कहना गलत होगा

BRICS के संदर्भ में सबसे ज्यादा चर्चा de-dollarisation की होती है।

इसका अर्थ यह नहीं कि BRICS कल से डॉलर को दुनिया से समाप्त कर देगा।

वास्तविक मुद्दा है—

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में केवल एक मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना।

इसके लिए चर्चा हो रही है—

National Currency Settlement

Cross-border Payment Systems

Payment Interoperability

Digital Payment Infrastructure

Central Bank Cooperation

CBDC/Digital Currency interfaces

की।

BRICS finance ministers और central bank governors ने 2026 में तेज, कम लागत और सुरक्षित cross-border payments तथा payment systems की interoperability पर जोर दिया है।

🇮🇳 14. भारत को BRICS से सबसे बड़ा फायदा क्या?

भारत के लिए BRICS का लाभ कई स्तरों पर है।

आर्थिक लाभ

भारत को बड़े बाजारों से—

Trade + Investment + Infrastructure Finance + Technology

के अवसर मिल सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा

Russia और Middle East के BRICS देशों के साथ संबंध भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।

Global South Leadership

भारत स्वयं को Global South की आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

Strategic Autonomy

भारत को पश्चिमी देशों और BRICS दोनों के साथ संवाद करने की क्षमता मिलती है।

China Management

BRICS भारत को चीन के साथ एक बहुपक्षीय मंच पर संवाद का अतिरिक्त माध्यम देता है।

Development Finance

NDB जैसी संस्था infrastructure financing के लिए वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराती है।

⚠️ 15. भारत को नुकसान या जोखिम क्या?

BRICS का दूसरा पहलू भी है।

सबसे बड़ी चुनौती है—

China Factor

BRICS में चीन आर्थिक रूप से सबसे शक्तिशाली सदस्यों में से एक है।

यदि BRICS का institutional architecture अत्यधिक China-centric हो जाता है तो भारत की strategic autonomy पर दबाव आ सकता है।

दूसरी चुनौती—

रूस-यूक्रेन संघर्ष

भारत रूस के साथ संबंध रखता है लेकिन पश्चिमी देशों के साथ भी उसके महत्वपूर्ण strategic partnerships हैं।

तीसरी—

Iran–Middle East tensions

BRICS में Iran और Gulf countries दोनों हैं। इनके बीच geopolitical तनाव संगठन के consensus को प्रभावित कर सकता है।

चौथी—

Economic imbalance

सभी सदस्य देशों की आर्थिक संरचना, मुद्रा व्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था और foreign-policy priorities अलग हैं।

इसलिए BRICS को एकीकृत आर्थिक संघ बनाना अत्यंत कठिन है।

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🇺🇸 16. अमेरिका की नजर BRICS पर क्यों?

BRICS के विस्तार ने Washington में रणनीतिक चर्चा बढ़ाई है।

कारण स्पष्ट है—

यदि दुनिया की लगभग आधी आबादी और लगभग 40% PPP-based global economic output वाला समूह अपने व्यापार, payment और financial infrastructure को अधिक स्वतंत्र बनाता है, तो मौजूदा global financial architecture पर उसका प्रभाव पड़ेगा।

लेकिन इसे सीधे—

“BRICS बनाम America”

कह देना भी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

BRICS के अंदर ही कई देश अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मजबूत व्यापारिक एवं रणनीतिक संबंध रखते हैं।

भारत इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है।

🇨🇳 17. चीन BRICS को कितना मजबूत बनाना चाहता है?

चीन BRICS को एक अधिक प्रभावशाली Global South platform के रूप में देखता है।

उसका उद्देश्य—

trade expansion

infrastructure

technology cooperation

financial connectivity

alternative payment mechanisms

Global Governance Reform

जैसे क्षेत्रों में BRICS की भूमिका बढ़ाना है।

लेकिन भारत और चीन के बीच सीमा विवाद तथा रणनीतिक प्रतिस्पर्धा मौजूद है।

यही कारण है कि BRICS में cooperation और competition दोनों एक साथ दिखाई देते हैं।

🇷🇺 18. रूस के लिए BRICS का महत्व

रूस के लिए BRICS केवल आर्थिक मंच नहीं है।

पश्चिमी sanctions और geopolitical isolation के बीच रूस के लिए BRICS—

Trade Diversification + Financial Connectivity + Diplomatic Space

प्रदान करता है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत में BRICS को technology, infrastructure, payments और investment cooperation जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।

🌎 19. Global South को BRICS क्या संदेश देता है?

BRICS का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश है—

> विश्व व्यवस्था केवल कुछ विकसित पश्चिमी शक्तियों के निर्णय से नहीं चलनी चाहिए।

 

BRICS देशों का जोर है कि—

UN Security Council reform हो

IMF और World Bank में प्रतिनिधित्व सुधरे

विकासशील देशों की आवाज बढ़े

वैश्विक वित्तीय व्यवस्था अधिक representative बने

विकासशील देशों को development finance मिले।

BRICS के आधिकारिक उद्देश्यों में भी Global South की अंतरराष्ट्रीय governance में भूमिका बढ़ाने और UN, IMF, World Bank तथा WTO जैसी संस्थाओं में अधिक equitable participation की मांग शामिल है।

🚨 20. BRICS के सामने सबसे बड़ी समस्या—Unity नहीं, Consensus है

BRICS की शक्ति उसकी संख्या है।

लेकिन उसकी कमजोरी भी यही संख्या है।

एक ही मंच पर—

China–India rivalry

Iran–Gulf tensions

Russia–West confrontation

Brazil की अलग आर्थिक प्राथमिकताएं

South Africa की African priorities

और अलग-अलग monetary systems मौजूद हैं।

इसलिए प्रश्न यह नहीं है कि BRICS के पास ताकत है या नहीं।

असल प्रश्न है—

क्या 11 अलग-अलग रणनीतिक हितों वाले देश एक साझा operational agenda बना पाएंगे?

यही दिल्ली Summit की सबसे बड़ी परीक्षा है।

🧠 21. BRICS क्या G7 को खत्म कर देगा?

नहीं—कम से कम निकट भविष्य में ऐसा कहना अतिशयोक्ति होगी।

BRICS और G7 की संरचना और आर्थिक प्रणाली अलग है।

BRICS की शक्ति मुख्यतः—

Demography + Resources + Emerging Markets + Energy + Manufacturing + Development Finance

में है।

G7 की ताकत—

Advanced Technology + Capital Markets + Reserve Currency Ecosystem + High-value Finance + Institutional Networks

में है।

इसलिए वास्तविक तस्वीर “एक दूसरे को खत्म करने” की नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन में competitive pluralism की है।

🧩 22. BRICS का सबसे बड़ा भविष्य—एक नई Financial Architecture?

यदि BRICS भविष्य में निम्न पांच चीजों को प्रभावी ढंग से जोड़ देता है—

1. National Currency Trade
2. Cross-border Payment Connectivity
3. Development Bank Financing
4. Digital Financial Infrastructure
5. Large Multilateral Trade Network

तो इसका प्रभाव केवल राजनीतिक नहीं बल्कि structural economic हो सकता है।

लेकिन यहां भी डॉलर का तत्काल विकल्प तैयार होना कठिन है।

Dollar की शक्ति केवल अमेरिकी मुद्रा होने से नहीं, बल्कि गहरे और अत्यधिक liquid financial markets, global trade invoicing, reserve holdings और institutional trust से आती है।

इसलिए BRICS का वास्तविक लक्ष्य अधिक व्यावहारिक रूप से financial diversification है, न कि रातोंरात dollar replacement।

🏦 23. NDB भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

NDB को BRICS की सबसे ठोस संस्थागत उपलब्धियों में माना जाता है।

इसका उद्देश्य infrastructure और sustainable development projects के लिए financing उपलब्ध कराना है। इसकी authorized capital $100 billion है।

भारत के लिए संभावित क्षेत्र—

Green Infrastructure

Renewable Energy

Urban Transport

Water Management

Smart Cities

Sustainable Infrastructure

Climate Resilience

जैसे क्षेत्र हैं।

इसका अर्थ यह है कि BRICS केवल बयान जारी करने वाला diplomatic forum नहीं, बल्कि कुछ क्षेत्रों में institution-building भी कर चुका है।

🚀 24. 2026 में भारत किन नए क्षेत्रों पर जोर दे रहा है?

भारत की Chairship के दौरान—

Startup Innovation

BRICS Startup Innovation Fund

Incubation

BRICS Incubator Network

Logistics

BRICS Logistics & Supply Chain Cooperation Framework

जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

इनका लक्ष्य startup ecosystem, innovation, entrepreneurship और resilient supply chains के बीच cross-border connectivity विकसित करना है।

🌱 25. “Resilience” शब्द इतना महत्वपूर्ण क्यों?

भारत की BRICS 2026 theme में Resilience प्रमुख शब्द है।

इसका अर्थ है—

युद्ध, महामारी, climate shock, supply-chain disruption, financial volatility और geopolitical crisis के बावजूद अर्थव्यवस्थाओं को काम करते रहने योग्य बनाना।

आज दुनिया में—

Semiconductor disruption + Energy crisis + Maritime disruption + Food security + Climate stress + Cyber risks

एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इसीलिए BRICS की नई रणनीति केवल GDP growth तक सीमित नहीं रह सकती।

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⚡ 26. भारत के लिए BRICS का असली strategic dividend

भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं कि उसने दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं को बुलाया।

असली उपलब्धि यह होगी कि भारत—

BRICS + Global South + West + Indo-Pacific

के बीच एक multi-vector diplomatic architecture बनाए रखने में सफल होता है।

भारत एक ओर—

🇺🇸 अमेरिका
🇪🇺 यूरोप
🇯🇵 जापान
🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया

के साथ strategic partnerships बनाए रखता है और दूसरी ओर—

🇷🇺 रूस
🇨🇳 चीन
🇮🇷 ईरान
🇦🇪 UAE
🇸🇦 Saudi Arabia

जैसे BRICS देशों के साथ भी संवाद बनाए रखता है।

इसे भारत की Strategic Autonomy की नीति के संदर्भ में समझना अधिक उचित होगा।

👁️ 27. BRICS पर किस-किस की नजर?

BRICS Summit को केवल सदस्य देशों की नजर से नहीं देखा जा रहा।

इस पर विशेष नजर है—

🇺🇸 United States

Dollar, trade और geopolitical influence के संदर्भ में।

🇪🇺 European Union

Trade diversification और emerging markets के संदर्भ में।

🇯🇵 Japan

Asian strategic balance के संदर्भ में।

🇦🇺 Australia

Indo-Pacific architecture के संदर्भ में।

🌍 Global South

विकास वित्त और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में।

और सबसे महत्वपूर्ण—

🇨🇳 चीन

BRICS को अधिक प्रभावशाली बनाने के दृष्टिकोण से।

🇷🇺 रूस

वैकल्पिक economic और diplomatic networks के दृष्टिकोण से।

🇮🇳 28. भारत से “ईर्ष्या” कौन करता है?

यहां पत्रकारिता में सावधानी जरूरी है।

किसी देश के बारे में बिना प्रमाण यह लिखना कि वह “भारत से ईर्ष्या करता है”, तथ्यात्मक पत्रकारिता नहीं होगी।

लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि भारत की बढ़ती आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक भूमिका से कुछ देशों की strategic calculations प्रभावित हो रही हैं।

भारत की BRICS अध्यक्षता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह—

China के साथ भी मंच साझा करता है, Russia के साथ भी strategic relationship रखता है और Western economies के साथ भी गहरी साझेदारी विकसित कर रहा है।

यह diplomatic balancing भारत को एक विशिष्ट स्थिति देता है।

🤝 29. भारत के साथ कौन खड़ा?

भारत के प्रमुख strategic partners में—

Russia, France, United States, Japan, Australia, UAE, Saudi Arabia और कई अन्य देश अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साझेदार हैं।

BRICS के भीतर विशेष रूप से Russia और भारत के बीच लंबे समय से strategic relationship है।

लेकिन BRICS को किसी एक देश का “भारत समर्थक गुट” मानना सही नहीं होगा।

यह एक multi-interest platform है।

👑 30. BRICS का अध्यक्ष कौन है?

BRICS का कोई स्थायी “President” नहीं होता।

Chairship rotational है।

2026 में—

🇮🇳 भारत BRICS का Chair है।

भारत की Chairship का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा है।

लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इसे किसी देश के स्थायी राष्ट्रपति पद की तरह नहीं समझा जाना चाहिए।

📌 31. दिल्ली Summit के प्रमुख एजेंडे

वर्तमान परिस्थितियों में प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं—

◆ Global Governance Reform
◆ UN Reform
◆ International Financial Institutions Reform
◆ Cross-border Payments
◆ National Currency Trade
◆ Supply-chain Resilience
◆ Energy Security
◆ Climate Change
◆ Technology & Innovation
◆ Artificial Intelligence
◆ Startup Ecosystem
◆ Sustainable Development
◆ Global South Cooperation
◆ Peace & Security

भारत के नेतृत्व में BRICS को अधिक practical और solutions-oriented बनाने पर जोर है।

⚠️ 32. BRICS की सबसे बड़ी परीक्षा—बयान से आगे परिणाम

BRICS की असली सफलता किसी आकर्षक declaration से तय नहीं होगी।

सफलता तब मानी जाएगी जब—

घोषणा → Policy → Institutional Mechanism → Financing → Implementation → Measurable Outcome

में परिवर्तित हो।

यदि BRICS केवल annual summit और joint declaration तक सीमित रहता है तो उसका प्रभाव सीमित रहेगा।

लेकिन यदि वह—

Payment Network + Development Finance + Supply Chain + Technology + Trade Facilitation

में concrete mechanism बना लेता है तो वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा हो सकता है।

🏁 33. निष्कर्ष: BRICS दुनिया बदल रहा है या केवल दुनिया को चेतावनी दे रहा है?

सच्चाई दोनों के बीच है।

BRICS अभी G7 का विकल्प नहीं है।

BRICS अभी Dollar का पूर्ण विकल्प नहीं है।

BRICS अभी एकीकृत आर्थिक संघ नहीं है।

लेकिन BRICS अब इतना बड़ा जरूर हो चुका है कि वैश्विक नीति-निर्माताओं के लिए इसे नजरअंदाज करना कठिन है।

लगभग 49.5% वैश्विक आबादी, लगभग 40% वैश्विक GDP और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करने वाला 11-सदस्यीय समूह जब financial architecture, trade, technology और global governance पर सामूहिक आवाज उठाता है तो उसका geopolitical weight स्वतः बढ़ जाता है।

और इस पूरे समीकरण के केंद्र में इस समय भारत है।

दिल्ली 2026 की सबसे बड़ी कहानी इसलिए केवल BRICS Summit नहीं है—बल्कि यह प्रश्न है कि भारत इस मंच को कितना व्यावहारिक, कितना संतुलित और कितना प्रभावशाली बना सकता है।

भारत के सामने अवसर भी विशाल है और चुनौती भी।

BRICS का भविष्य चीन की आर्थिक शक्ति, रूस की geopolitical आवश्यकता, Global South की आकांक्षा और भारत की strategic balancing—इन चारों के बीच बनने वाले संतुलन से तय होगा।

और यदि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान BRICS को “Declaration-driven forum” से “Implementation-driven platform” की दिशा में आगे ले जाने में सफल होता है, तो दिल्ली Summit केवल 2026 की एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं रहेगा—बल्कि बदलती हुई multipolar world order की दिशा में एक महत्वपूर्ण institutional milestone बन सकता है।

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