
“जेकर घर के होथे महिला सियान, तेकर मरे बिहान” छत्तीसगढ़ के लोकजीवन के गहिर दर्शन, परिवार के समृद्धि अऊ समाज के असली आधार के विशेष पड़ताल
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छत्तीसगढ़ के माटी मं जनम लेहे लोककहावत मन सिरिफ बोलचाल के सब्द नइ होवंय, ओमन पीढ़ी-दर-पीढ़ी संगे चले अनुभव, संस्कार अऊ समाज के गहिर समझ ला अपन भीतर समेटे रहिथें। अइसनेच एक बहुचर्चित कहावत आय—”जेकर घर के होथे महिला सियान, तेकर मरे बिहान।”
ए कहावत के मर्म सिरिफ महिला के प्रशंसा नइये, बल्कि ये बताथे कि परिवार के मजबूती, अपनापन, अनुशासन अऊ खुशहाली मं महिला के भूमिका कतका महत्वपूर्ण होथे।
◆ घर के पहिली पाठशाला – महतारी के गोद
एक लइका के पहिली किताब स्कूल नइ, ओकर महतारी के गोद होथे। बोलना, चलना, संस्कार, दया, मेहनत, ईमानदारी अऊ दूसर मन के सम्मान—ये सबके बीज घर के महिला अपन व्यवहार ले बोथे। ए कारण ले कहे जाथे कि जेन घर के महिला सियान होथे, ओ घर के अगली पीढ़ी घलो मजबूत बनथे।
◆ ‘सियान’ के मतलब सिरिफ उमर नइये
छत्तीसगढ़ी मं “सियान” के अर्थ सिरिफ बूढ़ या उमरदार नइ होय। सियान वो ह आय जेन परिस्थिति ला समझय, संकट मं धीरज रखय, परिवार ला जोड़े, सही फैसला लेय अऊ अपन अनुभव ले दूसर मन ला राह देखाय। पढ़ाई-लिखाई महत्वपूर्ण हवय, फेर जीवन के समझ अऊ विवेक घलो उतकेच जरूरी हवय।
◆ महिला – परिवार के अदृश्य शक्ति
एक महिला बिहान ले रात तक अइसने कतको काम करथे जेनकर अलग ले हिसाब नई होय। परिवार के भोजन, लइका मन के पढ़ई, बुजुर्ग मन के सेवा, अतिथि सत्कार, घर के आर्थिक संतुलन अऊ भावनात्मक सहारा—ये सब मं ओकर योगदान अक्सर चुपचाप रहिथे, फेर असर गहिर होथे।
◆ मया, अनुशासन अऊ संस्कार के संगम
सियान महिला परिवार मं सिरिफ मया नइ बाँटय, बल्कि अनुशासन अऊ जिम्मेदारी के सीख घलो देथे। ओकर बोली, ओकर व्यवहार अऊ ओकर निर्णय घर के वातावरण ला गढ़थे। जेन घर मं संवाद अऊ सम्मान होथे, उहां पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कार के परंपरा मजबूत होथे।
◆ गांव ले शहर तक – महिला के बदलत भूमिका
पहिली महिला मन के दायरा घर तक सीमित माने जावत रहिस। आज ओमन खेती, व्यापार, नौकरी, शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, न्यायपालिका, मीडिया अऊ उद्योग तक अपन पहचान बनावत हें। फेर चाहे गांव होवय या शहर, परिवार के भावनात्मक आधार बने रहना आज घलो महिला के बड़े योगदान मं गिनाय जाथे।
◆ त्याग के संग सम्मान घलो जरूरी
समाज मं महिला के त्याग के चर्चा बहुत होथे, फेर अब समय आय कि त्याग के संग-संग ओकर अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्णय लेय के अवसर अऊ सम्मान ला घलो बराबरी के महत्व देय जाय। मजबूत परिवार ओही होथे जिहां जिम्मेदारी साझा होय।
◆ ‘मरे बिहान’ के गहिर अर्थ
ए लोककहावत मं “मरे बिहान” के आशय उज्ज्वल, सुखमय अऊ समृद्ध भविष्य ले जोड़े जाथे। मतलब साफ आय—जेन घर मं समझदार, विवेकशील अऊ संस्कारी महिला होथे, ओ घर संकट मं घलो टूटे नई, बल्कि मिलजुल के आगे बढ़थे।
◆ आज के समाज बर संदेश
बेटी ला पढ़ई के अवसर, बहू ला सम्मान, पत्नी ला बराबरी अऊ महतारी ला आदर—ए चार खंभा जेन परिवार मं मजबूत होही, ओ परिवार के विकास घलो टिकाऊ होही। महिला के सम्मान सिरिफ महिला बर नइ, पूरा समाज बर निवेश आय।
निष्कर्ष
“जेकर घर के होथे महिला सियान, तेकर मरे बिहान” छत्तीसगढ़ के लोकबुद्धि के एक अमूल्य संदेश आय। ए कहावत हमन ला याद दिलाथे कि परिवार के असली समृद्धि धन-दौलत ले सिरिफ नई, बल्कि समझदारी, संस्कार, परस्पर सम्मान अऊ साझा जिम्मेदारी ले बनथे।
जेन घर मं महिला के आवाज सुने जाथे, ओकर विचार के सम्मान होथे अऊ ओकर सपन मन ला उड़ान मिले, ओ घर मं सिरिफ बिहान नई होय—ओ घर मं पीढ़ी-दर-पीढ़ी उजाला बस जाथे।
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