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आपदा राहत फंड का पूरा सच : पैसा कहां से आता है, कौन जारी करता है और पीड़ित तक कैसे पहुंचता है?

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विशेष विश्लेषण | प्रशासनिक, विधिक एवं आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की समीक्षा पर आधारित
भारत में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित नागरिकों को तत्काल राहत देने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत State Disaster Response Fund (SDRF) और गंभीर परिस्थितियों में National Disaster Response Fund (NDRF) संचालित किए जाते हैं। SDRF राज्य सरकारों के पास उपलब्ध प्राथमिक राहत कोष है, जबकि NDRF का उपयोग अत्यंत गंभीर आपदाओं में अतिरिक्त सहायता के लिए किया जाता है। �
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✦ आपदा राहत फंड किसके अधीन रहता है?
राज्य स्तर पर यह कोष राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा राज्य कार्यकारी समिति के नियंत्रण में संचालित होता है। जिला स्तर पर कलेक्टर (जिला मजिस्ट्रेट) राहत कार्यों के प्रमुख समन्वयक होते हैं। �
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✦ फंड जारी करने की प्रक्रिया
आपदा की सूचना मिलने पर पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम प्रारंभिक सर्वे करते हैं। रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से राज्य सरकार को भेजी जाती है। अनुमोदन के बाद SDRF से राशि जारी होती है। यदि आपदा अत्यंत गंभीर हो और SDRF अपर्याप्त हो, तो केंद्र सरकार से NDRF के माध्यम से अतिरिक्त सहायता स्वीकृत की जाती है। �
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✦ किन परिस्थितियों में राहत मिलती है?
अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं में सामान्यतः बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, आग, भूस्खलन, ओलावृष्टि, शीतलहर, लू, बिजली गिरना, बादल फटना, हिमस्खलन, सुनामी तथा कीट प्रकोप जैसी घटनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कुछ अन्य प्राकृतिक आपदाओं पर भी सीमित सीमा तक राहत दे सकती है। �
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✦ जनता को क्या लाभ मिलता है?
राहत राशि का उद्देश्य तत्काल सहायता देना है, न कि पूर्ण क्षतिपूर्ति। पात्र व्यक्तियों को परिस्थितियों के अनुसार अस्थायी आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा सहायता, पशुधन हानि, फसल क्षति, मकान क्षति तथा मृत्यु या गंभीर चोट की स्थिति में निर्धारित मानकों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। �
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✦ कितने अधिकारी शामिल होते हैं?
पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम, जनपद एवं नगर निकाय, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अंततः जिला कलेक्टर की भूमिका रहती है।
✦ फंड का दुरुपयोग रोकने की व्यवस्था
राहत वितरण का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों, पंचनामों, भौतिक सत्यापन, बैंक खाते में भुगतान, ऑडिट तथा राज्य एवं केंद्र सरकार की निगरानी के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।
✦ जांजगीर-चांपा जिले की स्थिति
जांजगीर-चांपा में बाढ़, अतिवृष्टि, बिजली गिरने, आगजनी तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत राशि SDRF के प्रावधानों के अनुसार स्वीकृत की जाती है। जिले के लिए कोई स्थायी निश्चित वार्षिक SDRF राशि सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं होती; आवश्यकता और स्वीकृति के अनुसार राज्य सरकार धन उपलब्ध कराती है। �
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✦ विशेषज्ञों की राय
प्रशासनिक एवं विधि विशेषज्ञों के अनुसार आपदा राहत कोष का मूल उद्देश्य “तत्काल मानवीय राहत” है। यह विकास योजनाओं का विकल्प नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा का संवैधानिक और मानवीय तंत्र है। पारदर्शी सर्वेक्षण, समयबद्ध भुगतान और डिजिटल निगरानी इसकी सफलता की प्रमुख शर्तें हैं।
निष्कर्ष:
आपदा राहत फंड केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि आपदा के समय राज्य की संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि नुकसान का आकलन कितनी निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता से किया जाता है तथा राहत कितनी शीघ्र पीड़ितों तक पहुंचती है। �
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