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एक उत्तरपुस्तिका… करोड़ों सपनों का भविष्य! | क्या CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है?

CBSE की On-Screen Marking व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच पारदर्शिता, तकनीकी विश्वसनीयता और छात्र अधिकारों की राष्ट्रीय पड़ताल

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विशेष खोजी विश्लेषण | राष्ट्रीय शिक्षा एवं नीति डेस्क

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“जब एक अंक मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, छात्रवृत्ति और करियर का भविष्य तय करता है, तब मूल्यांकन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं—संवैधानिक उत्तरदायित्व बन जाता है।”

भारत की शिक्षा व्यवस्था केवल परीक्षा आयोजित नहीं करती, बल्कि करोड़ों विद्यार्थियों के सपनों, परिवारों के विश्वास और राष्ट्र की भावी मानव पूंजी का मूल्यांकन करती है।

इसी परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2026 में लागू On-Screen Marking (OSM) प्रणाली ने शिक्षा जगत में एक नई तकनीकी क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया। लगभग 98.6 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया। उद्देश्य था—तेज़, मानकीकृत और अधिक पारदर्शी मूल्यांकन।

किन्तु परिणामों के बाद अनेक विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ गंभीर प्रश्न उठाए। कुछ मामलों में उत्तरपुस्तिका मिश्रण, स्कैनिंग गुणवत्ता की समस्या और मैनुअल पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता जैसी घटनाओं ने इस बहस को जन्म दिया कि—

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“क्या भारत की डिजिटल परीक्षा प्रणाली का स्वतंत्र तकनीकी एवं प्रशासनिक ऑडिट अब समय की मांग बन चुका है?”

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🚨 राष्ट्रीय जनहित के पाँच सबसे बड़े प्रश्न

⚖️ 1. यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बदल सकते हैं, तो क्या प्रारंभिक मूल्यांकन को पूर्णतः त्रुटिरहित माना जा सकता है?

🛰️ 2. क्या डिजिटल स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग की प्रत्येक परत का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन होना चाहिए?

📑 3. क्या प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी उत्तरपुस्तिका और मूल्यांकन प्रक्रिया तक अधिक पारदर्शी पहुँच मिलनी चाहिए?

💰 4. यदि पुनर्मूल्यांकन से त्रुटि सिद्ध होती है, तो शुल्क नीति की समीक्षा आवश्यक है?

🇮🇳 5. क्या राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र “Educational Evaluation Audit Framework” विकसित किया जाना चाहिए?

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🎯 विशेषज्ञों का निष्कर्ष

तकनीक शिक्षा व्यवस्था को अधिक सक्षम बना सकती है, परंतु किसी भी डिजिटल प्रणाली की विश्वसनीयता उसकी पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, गुणवत्ता नियंत्रण और स्वतंत्र ऑडिट पर निर्भर करती है।

शिक्षा का सबसे बड़ा आधार तकनीक नहीं—विश्वास है।
और विश्वास का सबसे मजबूत स्तंभ है—निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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