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छत्तीसगढ़

शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को नहीं मिली राहत, EOW की विशेष कोर्ट ने जमानत याचिका की खारिज

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत याचिका राजधानी रायपुर में EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) की विशेष अदालत में खारिज कर दी गई है। इससे पहले बीते सोमवार को ही चैतन्य बघेल को विशेष अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने सुनवाई के बाद उनकी जमानत याचिका अस्वीकृत कर दी और उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।

बता दें कि EOW की ओर से चैतन्य बघेल को 14 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और मामले में गहन अनुसंधान किया जा रहा है। ED-EOW 90 दिनों में जांच पूरी करेगी।

ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई।

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चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले

ईडी की जांच में पता चला है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के 16.70 करोड़ रुपए मिले हैं। उन्होंने इस पैसे का इस्तेमाल अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया है। इस पैसे का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया, जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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