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महीने के पहले ही दिन भारत का अमेरिका पर जबरदस्त प्रहार, हिल गया वाशिंगटन डीसी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ बम भारत तो झेल गया. गुरुवार और शुक्रवार का सुबह के सत्र में शेयर बाजार में सिर्फ मामूली गिरावट देखने को मिल रही है. लेकिन महीने के पहले ही दिन भारत ने जो अमेरिका पर प्रहार किया है, उससे पूरा वाशिंगटन डीसी हिल गया है. दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी समझ नहीं पा रही है कि आखिर ये हुआ कैसे? वास्तव में डॉलर के मुकाबले में रुपए ने ऐसी तेजी दिखाई है, जिसकी उम्मीद किसी को भी नहीं थी. खास बात तो ये है गुरुवार की तेजी को भी मिला दिया जाए तो रुपए ने डॉलर को पटखनी देते हुए 55 पैसे का इजाफा देखने को मिल चुका है. सुबह के सत्र में भी करेंसी मार्केट में रुपया 40 पैसे की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है.

शाम तक इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है. इस तेजी की प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आरबीआई का हस्तक्षेप है. वैसे डॉलर इंडेक्स 100 के लेवल के आसपास अभी भी कारोबार कर रहा है. इससे पहले अमेरिकी टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो रहा है. जिसको लेकर वॉशिंगटन की ओर से एग्जिक्यूटिव ऑर्डर जारी हो गया है. अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाया है, जिसकी वजह से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले किस लेवल पर कारोबार करता हुआ दिखाई दे रहा है.

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रुपए में डॉलर के मुकाबले जबरदस्त तेजी

लगातार दूसरे डॉलर के मुकाबले रुपए में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. कच्चे तेल की कम कीमतों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप की आशंका के बीच शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे बढ़कर 87.25 पर पहुंच गया. फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जोखिम-मुक्त भावना पैदा हुई है और रुपए के और गिरावट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. इसके अलावा, निवेशकों का ध्यान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 1 अगस्त से अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर नए और ज़्यादातर उच्च टैरिफ लगाने पर है.

इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया 87.60 पर खुला और डॉलर के मुकाबले 87.25 के शुरुआती उच्च स्तर को छू गया, जो पिछले बंद भाव से 40 पैसे की बढ़त दर्शाता है. गुरुवार को, रुपया अपने सर्वकालिक निम्नतम स्तर से 15 पैसे बढ़कर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 87.65 पर बंद हुआ. इसका मतलब है कि डॉलर के मुकाबले में रुपए में 55 पैसे की तेजी देखने को मिल चुकी है. जानकारों की मानें तो आने वाले कुछ दिनों में रुपए में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

इस बीच, छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 फीसदी बढ़कर 100.03 पर पहुंच गया. ब्रेंट ऑयल की कीमतें 0.97 फीसदी गिरकर 72.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं, क्योंकि व्यापारियों ने नए, उच्च अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को समझ लिया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों में कमी आ सकती है और ग्लोबल फ्यूल डिमांड कम हो सकती है.

घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 145.71 अंक या 0.18 प्रतिशत गिरकर 81,039.87 पर आ गया, जबकि निफ्टी 64.70 अंक या 0.26 फीसदी गिरकर 24,703.65 पर आ गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को शुद्ध आधार पर 5,588.91 करोड़ रुपए के शेयर बेचे.

घरेलू वृहद आर्थिक मोर्चे पर, लेखा महानियंत्रक (सीजीए) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत में केंद्र का राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 17.9 फीसदी रहा. पिछले वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में यह 2024-25 के बजट अनुमान (बीई) का 8.4 फीसदी था. कुल मिलाकर, राजकोषीय घाटा, या सरकार के व्यय और राजस्व के बीच का अंतर, वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून अवधि में 2,80,732 करोड़ रुपए था.

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क्या कहते हैं जानकार?

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि डॉलर अपने प्रमुख समकक्षों के मुकाबले लगभग तीन वर्षों में अपने सर्वश्रेष्ठ सप्ताह की ओर बढ़ रहा है, शुक्रवार को भी इसमें तेजी बनी रही, जबकि डोनाल्ड ट्रम्प ने दर्जनों व्यापारिक साझेदारों पर नई टैरिफ दरें लागू कीं.

भंसाली ने कहा कि गुरुवार को रुपया 87.75 के निचले स्तर पर पहुंच गया, लेकिन आरबीआई द्वारा बाजार को शांत करने के लिए हस्तक्षेप करने पर यह 87.5950 पर बंद हुआ. उन्होंने कहा कि अगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा संरक्षित किया जाता है, तो भारतीय रुपया आने वाले दिनों में जल्द ही 87.00 के स्तर पर पहुंच सकता है, लेकिन इसे एक सीमित दायरे में रखने के लिए आरबीआई की उपस्थिति और कड़ी निगरानी की आवश्यकता है.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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