Advertisment
छत्तीसगढ़

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा का समापन, मावली माता की डोली विदाई में उमड़ा जनसैलाब

S-G-Travels
WhatsApp-Image-2026-06-17-at-4.28.41-PM-300x200
WhatsApp Image 2026-07-05 at 5.05.16 PM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_44_19 AM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_46_45 AM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_35_18 AM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_41_56 AM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_49_26 AM
ChatGPT Image Aug 14, 2026, 09_53_04 AM

जगदलपुर. 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आज पारंपरिक विधि-विधान से समापन हुआ। अंतिम रस्म के रूप में मावली माता की डोली विदाई का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

शहर के गीदम रोड स्थित जिया डेरा मंदिर में मावली माता की पूजा-अर्चना माटी पुजारी और बस्तर राजपरिवार के सदस्य राजकुमार कमलचंद भंजदेव की मौजूदगी में हुई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे स्थानीय ग्रामीणों ने गाजे-बाजे और ढोल नगाड़ों की थाप पर माता की डोली को विदाई दी। शहर में निकाली गई विशाल कलश यात्रा ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।

परंपरा के अनुसार, कालांतर से बस्तर के राजा अन्नम देव स्वयं राजमहल से करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर माता की डोली को विदा करने पहुंचते थे। आज भी वही परंपरा निभाई जाती है, जो बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता और विरासत का प्रतीक है। डोली को रवाना करने से पहले बंदूक की सलामी दी गई और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं की आंखों में विदाई की नमी और भक्ति का भाव साफ झलक रहा था।

इसे भी पढ़ें:  अनूठी तस्करी : लोहे का पाइप लेकर जा रहे ट्रक में मिली 20 लाख की अफीम

चार दिनों तक मावली माता के दर्शन करने दंतेश्वरी मंदिर में उमड़ी भीड़

मावली माता की डोली को परंपरा के तहत दंतेवाड़ा के लिए रवाना किया गया। इससे पहले मावली परघाव रस्म के दौरान माता की डोली को चार दिनों तक माई दंतेश्वरी मंदिर परिसर में रखा गया था, जहां भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती रही। आज इस डोली विदाई के साथ ही 75 दिनों तक चला यह लोकोत्सव विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर बस्तर की परंपराओं, आस्था और जनसहभागिता की अनूठी झलक पूरे देश को दिखाई।

mediahousempcg

RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

Related Articles