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जांजगीर-चांपाछत्तीसगढ़

14 सितंबर 1997 का वो खौफनाक मंजर, जब चाम्पा के हसदेव नदी पुल से गिर गई थी ‘‘हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस’’

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जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चाम्पा जिले में आज से ठीक 27 साल पहले आज ही के दिन यानी 14 सितंबर 1997 को जब पूरा चांपा शहर गणेश उत्साह में डूबा था, तभी शाम को चाम्पा से एक ऐसी खबर आई, जिससे पूरा देश दहल गया। हसदेव नदी रेलवे पुल चाम्पा में अहमदाबाद एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होकर नदी में गिर गई। ट्रेन की पांच बोगी के दुर्घटनाग्रस्त होने से सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए।

इस दुर्घटना में मरने वालों की अधिकारिक पुष्टि भले ही 81 की जाती है, लेकिन वास्तव में सैकड़ों लोग दुनिया को अलविदा कह गए। इधर, इस भयंकर दुर्घटना की खबर मिलते ही चाम्पा शहर के लोग जिस स्थिति में थे, उसी स्थिति में पुल की ओर घायलों की मदद करने भागे। सैकड़ों घायलों को तुरंत सरस्वती शिशु मंदिर, लायंस स्कूल, बीडीएम चिकित्सालय चाम्पा में त्वरित उपचार के लिए भर्ती कराया गया।

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लायंस क्लब, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चाम्पा सेवा संस्थान, अक्षर साहित्य परिषद, स्वर्णकार समाज, देवांगन समाज, अग्रवाल समाज, प्रगतिशील स्वर्णकार संघ के अतिरिक्त अन्य संगठनों ने तन मन धन से दुर्घटना में घायल लोगों की सहायता की। तो वहीं घर-घर से भोजन इत्यादि की व्यवस्था की गई थी।

14 सितंबर 1997 चाम्पा रेल हादसे की तस्वीर

नगर के लोगों ने बताया कि 14 सितंबर 1997 का वह दर्दनाक हादसा, लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी। हसदेव नदी के पुल के ऊपर दो बोगियां लटक रही थी। उसमें बैठे लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी। राहत कार्य मे लगे लोगों ने ट्रेन में फंसे लोगों को बाहर निकाला और उन्हें आवश्यक उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चाम्पा वासियों ने तन मन धन से सेवाएं की। इतना ही नहीं मृतकों की आत्मा की शान्ति के लिए अनुष्ठानिक कार्य भी किया गया था।

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इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने जो आज भी रेलवे स्टेशन चाम्पा में फलों का व्यवसाय करते हैं। वे उसी दिन उसी एक्सप्रेस ट्रेन से बिलासपुर से चाम्पा आ रहे थे। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन के हसदेव नदी पर पहुंचते ही जोर की आवाज़ हुई और सीने में जोर की चोट लगी और वह बेहोश हो गया। जब वो होश में आया तब बिसाहूदास महंत अस्पताल के बेड में अपने आप को पाकर भयभीत हो गया। उन्होंने कहा कि उस खौफनाक मंजर की याद आते ही तन बदन सिहर उठता है।

चाम्पा नगर का गणेशोत्सव छत्तीसगढ़ अंचल में सुप्रसिद्ध है। इस घटना के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी चाम्पा में गणेशोत्सव अत्यंत सादगीपूर्वक मनाया जाता है। हादसे के साक्षी लोगों से पूछताछ करने पर लोग इस खौफ़नाक मंज़र को याद कर उनका दिल को दहल जाता है।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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