
कुंभ की गलियों में गूगल भी रास्ता भूला, सेक्टर का गणित समझिए ताकि न हो परेशानी
मौनी अमावस्या के स्नान की तारीख करीब है और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में पुलिस प्रशासन प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या में बदलाव के आधार पर मार्ग को खोलने और बंद करने का काम कर रहा है। इससे हो यह रहा है कि जिन लागों को जानकारी नहीं है वो गूगल मैप का प्रयोग कर रहे हैं और रास्तों के जाल में उलझ जा रहे हैं। इसके साथ ही उन लोगों को भी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है जो लोग पांटून पुल पर होते हैं। वहां से लोकेशन में मैप का प्रयोग करने पर कई बार दिखाता है कि आप नदी में है।
मैप खोलने के बाद भी सुरक्षाकर्मियों से मदद लेनी पड़ी
ऐसा ही एक अनुभव त्रिवेणी संकुल, मेला सर्किट हाउस को लेकर हुआ। रास्ता जहां का गूगल मैप में आ रहा था उससे आधा किलोमीटर पहले दूसरी दिशा में यह स्थित था। मैप खोलने के बाद भी हमें वहां पहुंचने के लिए सुरक्षाकर्मियों की सहायता लेनी पड़ी।
इतना ही नहीं इस बार 2750 AI आधारित सीसीटीवी कैमरों का प्रयोग किया गया है। इन कैमरों के माध्यम से पुलिस को इस बात की भी जानकारी लग जाती है कि किस ओर भीड़ ज्यादा है और यह पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं। जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। लेकिन इन सब के बीच में एक आम श्रद्धालुओं को काफी परेशान हो रही है। कई बार गूगल मैप भी सही राहों की जानकारी नहीं दे पा रहा है। इस वजह से कई किलोमीटर पैदल चलने वालों को एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। गूगन ने पहली बार किसी अस्थायी नगर के लिए नेविगेशन सुविधा देने का निर्णय लिया है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्कता है। यह सुविधा 4000 हेक्टेयर में फैले महाकुंभ मेले में उपलब्ध कराई जा रही है।



