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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र, कैविएट दाखिल कर कहा- हमारा पक्ष सुने बिना न सुनाएं आदेश

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वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंची है. केंद्र ने एकतरफा आदेश की आशंका से बचने के लिए मंगलवार को कोर्ट में कैविएट दाखिल किया. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से वक्फ कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं पर उसका पक्ष सुने बिना आदेश न देने की मांग की है. दरअसल अब तक इस मामले में 15 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. कोर्ट 15 अप्रैल को याचिकाओं पर सुनवाई कर सकती है.

वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं ने इस वक्फ संशोधन अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (समानता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) 26 (धार्मिक मामलों की व्यवस्था) और 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) जैसे मौलिक अधिकारों के विरुद्ध बताया है. इसके अलावा याचिकाकर्ताओं ने कानून में बदलाव को अनुच्छेद 300A यानी संपत्ति के अधिकार के भी खिलाफ बताया है.

बता दें कि 7 अप्रैल को याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा ने सुप्रीम कोर्ट से जल्दी सुनवाई की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई का आश्वासन दिया है. हालांकि सीजेआई संजीव खन्ना ने एडवोकेट कपिल सिब्बल से कहा था कि उन्हें अर्जेंट हियरिंग के लिए कोर्ट आने की जरूरत नहीं थी, उसके लिए अलग प्रक्रिया की व्यवस्था बनी हुई है. उन्होंने कहा था कि लिस्टिंग और तत्काल सुनवाई के लिए अलग से प्रक्रिया बनी है, जिसका पालन होना चाहिए.

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अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि बिना किसी दबाव के उन्होंने सिर्फ तत्काल हियरिंग का उल्लेख किया था. सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा था कि मामले को जल्दी ही लिस्ट करेंगे. सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वक्फ कानून को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई की अनुमानित तारीख 15 अप्रैल लिखी है.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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