MEDIA HOUSE EXCLUSIVE
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जांजगीर-चांपा और CSR की बदलती तस्वीर: उद्योगों की शक्ति, समाज की अपेक्षाएँ और विकास की नई दिशा
MEDIA HOUSE MPCG.COM RAJEEV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE ✍️ विशेष विश्लेषण | जनहित • विकास • पारदर्शिता जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ का…
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आज 15 जुलाई 2026 की 50 बड़ी सुर्खियाँ | देश-दुनिया की प्रमुख हलचल एक नज़र में
1. 🔥🇮🇳 देशभर में विकास योजनाओं को नई रफ्तार, कई राज्यों में बड़े फैसले। 2. 🚨⚖️ सुप्रीम कोर्ट से जुड़े…
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15 जुलाई : एक ऐसी तारीख जिसने इतिहास लिखा, वर्तमान को दिशा दी और भविष्य को प्रेरणा दी
1. 15 जुलाई की वैश्विक पहचान 15 जुलाई विश्व स्तर पर केवल एक सामान्य कैलेंडर तिथि नहीं है, बल्कि विज्ञान,…
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बरसात का अदृश्य संकट: हर साल सर्पदंश और जहरीले जंतुओं से जाती सैकड़ों जिंदगियां, आखिर रोकथाम की ठोस व्यवस्था कब?
बरसात की पहली बारिश जहां खेतों और जंगलों में हरियाली लाती है, वहीं यह मौसम एक ऐसे अदृश्य खतरे को…
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आज 14 जुलाई 2026 की 10 सबसे बड़ी सुर्खियाँ | देश • विदेश • छत्तीसगढ़ • जांजगीर-चांपा
① 🇮🇳⚖️ लोकतंत्र की नई बहस: चुनावी व्यवस्था पर बढ़ी राष्ट्रीय चर्चा देशभर में चुनावी प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और मतदाता व्यवस्था…
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साइलेंट किलर: गोली नहीं चलती, लेकिन ज़िंदगियाँ टूट जाती हैं! क्या मानसिक, आर्थिक, साइबर और सामाजिक शोषण के अदृश्य अपराधों पर अब विशेष अभियान की ज़रूरत है?
कानून की नज़र अक्सर उस अपराध तक पहुँच जाती है जहाँ हथियार दिखाई देता है, लेकिन समाज में कुछ ऐसे…
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समय बनाम प्रशासन : क्या भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को नई कसौटी की आवश्यकता है? जब हर मिनट जनता का है, तो हर मिनट का हिसाब भी जनता को मिलना चाहिए
भूमिका | लोकतंत्र की सबसे महंगी पूंजी पैसा नहीं, समय है भारत का प्रत्येक नागरिक प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से…
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14 जुलाई : केवल एक तारीख नहीं, बल्कि लोकतंत्र, जनचेतना और परिवर्तन का वैश्विक प्रतीक
प्रस्तावना | इतिहास की वे तिथियाँ जो सभ्यता की दिशा बदल देती हैं विश्व इतिहास में कुछ तिथियाँ केवल कैलेंडर…
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मेहनत की कीमत कौन तय करता है? ₹500 का पसीना और ₹5000 का निर्णय—क्या लोकतंत्र में श्रम, जिम्मेदारी और सम्मान का संतुलन न्यायपूर्ण है?
प्रस्तावना | एक प्रश्न जो हर शहर, हर गाँव और हर परिवार से जुड़ा है सुबह का समय है। एक…
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“टाइटल, जाति और प्रशासनिक रुतबा: क्या लोकतंत्र के भीतर आज भी वर्ण व्यवस्था की अदृश्य छाया मौजूद है?”
विशेष टिप्पणी: यह रिपोर्ट किसी जाति, वर्ग या समुदाय के पक्ष अथवा विपक्ष में नहीं है। इसका उद्देश्य समाजशास्त्र, इतिहास,…
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