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	<title>शुभ मुहूर्त &#8211; MEDIA HOUSE MPCG</title>
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		<title>आज देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही कृष्ण जन्माष्टमी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि से भोग तक</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/today-know-krishna-janmashtami-being-celebrated-with-great-pomp-across-the-country-from-auspicious-time-to-worship-from-the-method-of-worship/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 11:23:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज परे देश भर में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह त्योहार भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार,जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल अष्टमी तिथि की शुरुआत शुक्रवार, &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>आज परे देश भर में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह त्योहार भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार,जन्माष्टमी का त्योहार भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल अष्टमी तिथि की शुरुआत शुक्रवार, 15 अगस्त 2025 की रात 11:49 बजे से हो गई है, जिसका समापन 16 अगस्त की रात 9:34 बजे होगा. इसलिए इस साल जन्माष्टमी का पर्व शनिवार, 16 अगस्त को धूमधाम से मनाई जा रही है.</p>
<p>भगवान श्री कृष्ण विष्णु के अष्टम अवतार हैं. हिन्दू मान्यता के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी के दिन उपवास रखने से एकादशी व्रत की भांति फल की प्राप्ति होती है. बता दें कि भगवान कृष्ण का जन्म माता देवकी के गर्भ से अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.</p>
<h3><strong>कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र कब</strong></h3>
<p>1. <strong>रोहिणी नक्षत्र का आरंभ:</strong>  रविवार, 17 अगस्त 2025 की सुबह 4:38 बजे</p>
<p>2. <strong>रोहिणी नक्षत्र का समापन: </strong>सोमवार,<strong> </strong>18 अगस्त 2025 को सुबह 3:17 बजे</p>
<h3><strong>43 मिनट का मुहूर्त, इस अवधि में करें भगवान श्री कृष्ण को पूजा</strong></h3>
<p>हालांकि पूजा का शुभ मुहूर्त  शनिवार, 16 अगस्त की देर रात 12:04 से12:47 बजे तक है. ऐसे में आप 43 मिनट की शुभ मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण की पूजा कर सकते हैं.</p>
<p>हिंदू धर्म के अनुसार, जन्माष्मी के दिन भगवान श्री कृष्ण की उपासना की जाती है. व्रत रखने से भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. साथ ही जीवन की समस्याएं दूर होती है.</p>
<h3><strong>कृष्ण जन्माष्टमी आज, यहां जानिए पूजा सामग्री</strong></h3>
<p>चौकी, लड्डू गोपाल के लिए वस्त्र, सिंहासन, आसन, गंगाजल, दूध, दही, पंचामृत, शहद, गाय का घी,हल्दी, रोली, चंदन, केसर, पुष्प (पीले फूल), कमल का फूल,  इत्र, मौली, रुई,पान, सुपारी, धूप, दीप, काजल, अक्षत, कपूर आदि.</p>
<h3><strong>कान्हा के मनपसंद 8 भोग</strong></h3>
<p>मक्खन-मिश्री, पंच-मेवा, खीरा, धनिया पंजीरी, तुलसी दल (तुलसी पत्ता), छोटी इलायची, लौंग  नारियल, आदि रखें. आप कान्हा को 56 भोग भी लगा सकते हैं.</p>
<h3><strong>कैसे करें कान्हा को पूजा</strong></h3>
<div class="sp_only-ul-ol sp_only-ul-ol-2">
<ul>
<li>अर्द्धरात्रि यानी रात 12 बजे कान्हा को खीरे के अंदर रखें.</li>
<li>जन्म के दौरान खीरे से भगवान कान्हा को बाहर निकाले.</li>
<li>अब कान्हा को कच्चा दूध, दही, पंचामृत, शहद, घी और गंगाजल से स्नान कराएं</li>
<li>अब साफ-सुथरे कपड़े से कान्हा को लपेटे.</li>
<li>इसके बाद उन्हें वस्त्र पहनाएं.</li>
<li>अब प्रभु कान्हा को बांसुरी, वैजयंती माला, तुलसी की माला, मोर मुकुट समेत सभी आभूषणों से श्रृंगार करें.</li>
<li>अब चंदन, केसर और हल्दी से तिलक करें.</li>
<li>फुल, प्रसाद (भोग) आदि भगवान श्री कृष्ण को अर्पित करें.</li>
<li> अब भगवान की आरती करें.</li>
<li>आखिरी में प्रसाद को भक्तों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें.</li>
</ul>
</div>
<p>बता दें कि कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर अर्द्धरात्रि में भजन और कीर्तन अवश्य करें.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>पुत्रदा एकादशी के दिन करें तुलसी और पीपल से जुड़ा ये उपाय, मां लक्ष्मी लगा देंगी घर में धन का अंबार..यहां जानें पूजा विधि और तारीख</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/on-the-day-of-putrada-ekadashi-do-this-remedy-related-to-tulsi-and-peepal/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 12:39:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अयोध्या: सावन का पवित्र महीना चल रहा है और सावन के इस पवित्र महीने में सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए कई बड़े पर्व और त्योहार मनाया जाते हैं. जो अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. सावन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div><strong>अयोध्या:</strong> सावन का पवित्र महीना चल रहा है और सावन के इस पवित्र महीने में सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए कई बड़े पर्व और त्योहार मनाया जाते हैं. जो अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. सावन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. एकादशी तिथि के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है और उनके निमित्त इस दिन व्रत भी किया जाता है.&nbsp;</p>
<div>ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए लोग इस दिन कुछ खास उपाय भी करते हैं. कहा जाता है इस दिन कुछ खास उपाय करने से जीवन में चल रही तमाम तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलती है. साथ ही, तुलसी से जुड़ा कुछ खास उपाय किया जाए, तो आर्थिक स्थिति भी बेहतर होती है, तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं..</div>
</div>
<div></div>
<div><strong>कब है पुत्रदा एकादशी</strong></div>
<div></div>
<div>
<div>
<div>अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि 5 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के निमित्त व्रत रखा जाता है, तो वहीं इस दिन तुलसी से जुड़ा कुछ खास उपाय करने से चल रही परेशानियां समाप्त होती है.</div>
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</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div><strong>तुलसी की पूजा का विशेष महत्व</strong>&nbsp;</p>
<div>एकादशी तिथि के दिन तुलसी की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास देसी घी का दीपक जलाना चाहिए. इसके साथ माता तुलसी की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए, मंत्र का जाप करना चाहिए और आरती करनी चाहिए. ऐसा करने से जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है. आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है.</div>
</div>
</div>
<div></div>
<div>
<div>
<div><strong>पीपल के पेड़ की पूजा</strong></div>
</div>
<div>एकादशी तिथि के दिन पीपल के पेड़ में सभी देवी देवता का वास माना जाता है. ऐसे में अगर आप पुत्रदा एकादशी तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करते हैं और दीपक प्रज्वलित करते हैं, तो ऐसा करने से शुभ परिणाम प्राप्त होंगे.&nbsp;</p>
<div><strong>दीपक जलाना काफी शुभ</strong><br />
एकादशी तिथि के दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाना काफी शुभ माना जाता है. एकादशी को सूर्यास्त के बाद अगर आप घर के मुख्य द्वार पर दीपक जला रहे हैं, तो ऐसा करने से माता लक्ष्मी का आगमन होगा.</div>
</div>
</div>
<div></div>
<div></div>
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		<item>
		<title>इस साल का मकर संक्रांति है बहुत खास, 19 साल बाद बनने वाले हैं ये खास योग</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/this-years-makar-sankranti-is-very-special-these-special-yogas-are-going-to-be-formed-after-19-years/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jan 2025 13:59:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सनातन धर्म में साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति का होता है. हर साल जनवरी महीने में 13 से 15 तारीख के बीच इस त्योहार को मनाया जाता है. साल 2025 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा. मान्यता के अनुसार, संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सनातन धर्म में साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति का होता है. हर साल जनवरी महीने में 13 से 15 तारीख के बीच इस त्योहार को मनाया जाता है. साल 2025 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा. मान्यता के अनुसार, संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे सूर्य का उत्तरायण भी कहा जाता है. इस दिन एक खास संयोग भी बन रहा है. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं.</p>
<h3><strong>इस दिन मनाई जाएगी मकर संक्रांति 2025<br />
</strong></h3>
<p>मकर संक्रांति का त्योहार इस साल 2025 में 14 जनवरी को मनाया जाएगा. हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह 9:03 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. उदयातिथि के अनुसार, भारत में मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन स्नान-दान करने के लिए खास शुभ मुहूर्त है.</p>
<h3><strong>मकर संक्रांति 2025 का शुभ मुहूर्त</strong></h3>
<p>मकर संक्रांति 2025 के अगर शुभ मुहूर्त की बात करें, तो मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को पुण्य काल सुबह 09:03 बजे, जो शाम 5:46 बजे तक रहेगी.</p>
<h3><strong>स्नान का शुभ मुहूर्त</strong></h3>
<p>14 जनवरी 2025 को स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 3 मिनट से सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक है. इस महा पुण्य काल में स्नान और दान करने का खास पु्ण्य मिलता है.</p>
<h3><strong>मकर संक्रांति 2025 का विशेष संयोग</strong></h3>
<p>मकर संक्रांति के दिन एक विशेष संयोग बन रहा है. इस दिन 19 साल बाद दुर्लभ भौम पुष्प योग बन रहा है. ज्योतिष शास्त्र में भौम पुष्प योग को अत्यंत शुभ माना जाता है. यह योग मंगल और पुष्य नक्षत्र के मिलन से बनता है. इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है.</p>
<h3 class="webstry_wrp"><strong>मकर संक्रांति का महत्व</strong></h3>
<p>मकर संक्रांति का धार्मिक, सांस्कृतिक और खगोलीय, तीनों रुपों में बहुत खास महत्व है. धार्मिक मान्यता में ये दिन भगवान सूर्य की पूजा के लिए खास दिन माना जाता है. इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. सांस्कृतिक रूप से यह पर्व नई फसल के आगमन की खुशी का प्रतीक है. इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजें खाई जाती हैं और पतंगें उड़ाई जाती हैं. खगोलीय दृष्टि से इस दिन सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है, जिससे इस दिन के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं.</p>
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		<item>
		<title>आज के बाद दो महीने शादी का मुहूर्त नहीं, गुरु-शुक्र अस्त रहने से अक्षय तृतीया पर भी मुहूर्त नहीं; 9 जुलाई से शुरू होंगी शादियां</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/after-today-there-is-no-auspicious-time-for-marriage-for-two-months-due-to-the-setting-of-guru-venus/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Apr 2024 04:27:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जरूरत की खबर]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आज यानी 30 अप्रैल को आखिरी विवाह मुहूर्त है। इसके बाद 2 महीने के लिए शादियां रुक जाएंगी, क्योंकि गुरु और शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। इस वजह से अक्षय तृतीया पर भी शादी का मुहूर्त नहीं है। अब 30 अप्रैल के बाद शादी के लिए अगला मुहूर्त 9 जुलाई को रहेगा। इस साल गुरु और &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="">आज यानी 30 अप्रैल को आखिरी विवाह मुहूर्त है। इसके बाद 2 महीने के लिए शादियां रुक जाएंगी, क्योंकि गुरु और शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे। इस वजह से अक्षय तृतीया पर भी शादी का मुहूर्त नहीं है। अब 30 अप्रैल के बाद शादी के लिए अगला मुहूर्त 9 जुलाई को रहेगा।</p>
<p class="">इस साल गुरु और शुक्र के अस्त रहने से अक्षय तृतीया (10 मई) पर भी शादियों का मुहूर्त नहीं है, जबकि इस पर्व को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अबूझ का मतलब है कि बिना मुहूर्त निकाले भी इस दिन शादी कर सकते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। इससे पहले 2016 में शुक्र अस्त होने से अक्षय तृतीया पर शादी का मुहूर्त नहीं था।</p>
<p class=""><strong>गुरु 5 जून तक और शुक्र 27 जून तक अस्त रहेगा</strong><br />
गुरु 8 मई से 5 जून तक अस्त रहेगा। वहीं, शुक्र 4 मई से 27 जून तक अस्त होगा। इस कारण मई और जून में शादी सहित किसी भी मांगलिक काम के लिए मुहूर्त नहीं होंगे। दोनों ग्रह के उदय होने के बाद 9 जुलाई से विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>होलिका दहन की रात भद्रा का साया, शुभ मुहूर्त में जलाएं होली</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/on-the-night-of-holika-dahan-burn-holi-in-the-auspicious-time-under-the-shadow-of-bhadra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Mar 2024 05:09:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[ज्योतिष – वास्तु]]></category>
		<category><![CDATA[शुभ मुहूर्त]]></category>
		<category><![CDATA[होलिका दहन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.mediahousempcg.com/?p=3419</guid>

					<description><![CDATA[<p>Holika Dahan : होली का त्योहार रंगों और हर्षोल्लास का त्योहार है. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, होलिका दहन शुभ मुहूर्त में किया जाता है. होलिका दहन 24 मार्च को किया जाएगा. होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा रहित &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Holika Dahan</strong> : होली का त्योहार रंगों और हर्षोल्लास का त्योहार है. इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, होलिका दहन शुभ मुहूर्त में किया जाता है. होलिका दहन 24 मार्च को किया जाएगा. होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को भद्रा रहित प्रदोष काल मुहूर्त में करने का विधान है, लेकिन जब भद्रा लगी होती है तो होलिका दहन नहीं किया जाता है. इस साल होलिका दहन का सही समय क्या है? आइए जानते हैं होलिका दहन का सही समय क्या है.</p>
<p>24 मार्च रविवार को रात में 10:28 बजे भद्रा खत्म होगी, उसके बाद आप होलिका दहन कर सकते हैं. इस वर्ष 24 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. इसके लिए शुभ मुहूर्त देर रात 11:13 बजे से लेकर 12:27 मिनट तक रहेगा.ऐसे में होलिका दहन के लिए आपको कुल 1 घंटे 14 मिनट का समय मिलेगा. रविवार को जब आप होलिका दहन करें, तो उस समय ‘ॐ होलिकायै नमः’ मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.</p>
<h2 class="wp-block-heading">होलिका दहन की विधि</h2>
<p>होलिका दहन वाले दिन शुभ मुहूर्त में होलिका के पास एक कलश स्थापित कर दें. ये कलश दक्षिण दिशा में रखें उसके बाद पंच देवताओं की पूजा करें. अब होलिका का मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें. इस दौरान भक्त प्रह्लाद और भगवान हिरण्यकश्यप की भी पूजा करें. उसके बाद होलिका की 7 बार परिक्रमा करें और परिक्रमा के दौरान ही उसमें कच्चा सूत लपेट दें. उसके बाद नारियल, जल और अन्य पूजा सामग्री होलिका को अर्पित करें. अब होलिका दहन करें. मान्यता है कि होलिका की अग्नि में गेहूं की बालियां सेंककर खाने से स्वास्थ्य लाभ होता है.</p>
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