
रायपुर :सीबीएसई स्कूल पांचवीं आठवीं बोर्ड परीक्षा का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में सीजी बोर्ड से मान्यता के बावजूद सीबीएसई पैटर्न पढ़ाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है. इस पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता विकास तिवारी ने आपत्ति जताई है. विकास तिवारी के मुताबिक जब मान्यता सीजी बोर्ड से मिली थी तो उन स्कूलों में मोटी रकम फीस लेकर प्राइवेट किताबें क्यों पढ़ाई गई. जबकि सरकार उन्हें सीजी बोर्ड की नि:शुल्क किताब उपलब्ध करा रही थी.
शिक्षा विभाग पर मनमानी का आरोप
वहीं इस मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि उन्होंने पहले ही शिक्षा विभाग को लिखकर दिया था कि वो सीजी समग्र एवं मूल्यांकन पैटर्न पर बच्चों को पढ़ाएंगे.लेकिन अब बीच सत्र में सीजी बोर्ड पांचवीं और आठवीं की परीक्षा आयोजित कर शिक्षा विभाग मनमानी करने पर आमादा है. इस मामले को लेकर भी उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था. जहां कोर्ट ने कर्नाटक के मामले को लेकर हुए निर्णय का हवाला देते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते. जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है.
हाईकोर्ट ने 10 दिन में मांगा जवाब
इस मामले को लेकर सीबीएसई स्कूल ने हाईकोर्ट का रुख किया था. जहां हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग से 10 दिन में जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने पूछा कि जब कर्नाटक में बीच सत्र में इस तरह का निर्णय लिया गया था, तो उसका भी एक आदेश आया था. उस आदेश के तहत छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग निर्णय क्यों नहीं ले सकता. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सीबीएसई स्कूलों ने थोड़ी राहत की सांस ली है. लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उन्हें पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा देनी है या नहीं. हालांकि शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि शासकीय स्कूल, निजी और सीबीएसई स्कूल सभी में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं होने जा रही है, जिसकी तैयारी में वह जुट गए हैं.
कर्नाटक की तर्ज पर फैसला लेने की गुजारिश
सीबीएसई स्कूल आठवीं बोर्ड परीक्षा को लेकर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई.इसकी जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा को लेकर हम उच्च न्यायालय गए थे. जहां हाईकोर्ट ने सोमवार को बहस के बाद स्कूल शिक्षा विभाग को कहा कि इस सिमिलर मैटर पर कर्नाटक में भी आदेश हुए, तो क्यों ना इस आदेश को ध्यान में रखते हुए, ऐसा ही आदेश राज्य में किया जाए, क्योंकि आपने भी बीच सत्र में परीक्षा लागू की है.उसका जवाब 10 दिन के अंदर स्कूल विभाग को देना है.



